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ऑनलाईन गझल मुशायरा - भाग आठ
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नव्या गझल
| गझल | गझलकार | प्रतिसाद |
|---|---|---|
| शिंपडावे तू कधी | निशिकान्त् | 0 |
| एकरुप | सचिन म्हैसकर | 0 |
| बस एक श्वास आहे | निशिकान्त् | 0 |
| सार | सचिन म्हैसकर | 0 |
| तू हे बरे केले! | सचिन म्हैसकर | 1 |
| गजला घरात माझ्या | निशिकान्त् | 2 |
| चेहरे मी पाहिले | निशिकान्त् | 0 |
| मुक्तके | अनि | 0 |
| हीच का ती माणसे? | निशिकान्त् | 0 |
| रचल्या तुझ्याच साठी | निशिकान्त् | 0 |
नवे प्रश्न / शंका
| प्रश्न | प्रश्नार्थी | उत्तरे |
|---|---|---|
| माझी ही रचना गझल होवु शकते का ? | रुपेन्द्र कदम | 0 |
| वृत्त : बरेचसे कन्फ्युजन आहे..जाणकारांचे मार्गदर्शन अपेक्शीत आहे !!! | गिरीश कुलकर्णी | 4 |
| गझल् | sudame.akshay | 1 |
| गझल तन्त्र व मन्त्र् | श्रीधर् जहागिरदार् | 1 |
| स्पर्धा | सागरप्रकाश | 3 |
| GAZAL by ilahi JAMADAR | sudame.akshay | 3 |
